नई दिल्ली: यमन को लेकर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच बढ़ते मतभेदों ने भारत के लिए एक जटिल स्थिति पैदा कर दी है। दोनों ही देश भारत के करीबी मित्र हैं और इनके साथ भारत के मजबूत आर्थिक, ऊर्जा और रणनीतिक संबंध हैं। ऐसे में भारत के लिए किसी एक पक्ष का समर्थन करना आसान नहीं है।

यमन संकट में सऊदी अरब एक एकजुट देश का पक्ष ले रहा है, जबकि यूएई दक्षिणी यमन के कुछ अलगाववादी समूहों का समर्थन कर रहा है। इस टकराव से पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है। भारत इस पूरे घटनाक्रम पर सावधानी से नजर बनाए हुए है।

सऊदी अरब भारत को बड़ी मात्रा में कच्चा तेल सप्लाई करता है, वहीं यूएई भारत के लिए एक बड़ा व्यापारिक और निवेश भागीदार है। यही कारण है कि भारत संतुलन की नीति अपनाते हुए फिलहाल इस विवाद में किसी भी पक्ष के समर्थन में खुलकर सामने नहीं आया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत शांति और बातचीत के जरिए समाधान का समर्थन करेगा। भारत की कोशिश रहेगी कि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे, ताकि ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीयों के हित सुरक्षित रह सकें।