
नई दिल्ली: देश में प्रदूषण को कम करने और महंगे पेट्रोल से निजात दिलाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। भारत में अब 100 फीसदी इथेनॉल आधारित ईंधन यानी E100 फ्यूल को कानूनी मंजूरी दे दी गई है। इस बड़े फैसले के बाद अब आने वाले समय में भारतीय बाजारों में ऐसे आधुनिक वाहन सड़कों पर दौड़ते नजर आएंगे, जो बिना एक बूंद पेट्रोल के, सिर्फ और सिर्फ इथेनॉल के दम पर चलेंगे।
E100 एक ऐसा चमत्कारी ईंधन है, जिसमें लगभग 100 प्रतिशत इथेनॉल होता है और इसमें सामान्य पेट्रोल का बिल्कुल भी मिश्रण नहीं किया जाता। इसे गन्ने, मक्के, चावल और खेती के बचे हुए कचरे (कृषि अपशिष्ट) से तैयार किया जाता है। देखा जाए तो अभी हमारे देश में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है, लेकिन अब E100 को इसी दिशा में अगला और सबसे बड़ा क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।
सरकार द्वारा E100 फ्यूल को हरी झंडी देने की सबसे बड़ी वजह विदेशों से आने वाले कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) पर भारत की निर्भरता को पूरी तरह खत्म करना है। अगर देश में ही इथेनॉल का उत्पादन बड़े पैमाने पर होने लगेगा, तो विदेशी तेल पर खर्च होने वाले अरबों रुपये बचेंगे और इसका सीधा फायदा हमारे अन्नदाताओं यानी किसानों को मिलेगा। इससे गन्ना, मक्का और अन्य फसलों की मांग आसमान छुएगी, जिससे किसानों की आमदनी में बंपर इजाफा होने की पूरी संभावना है।
हालांकि, 100% इथेनॉल का यह सफर इतना भी आसान नहीं है, क्योंकि इसके सामने कुछ बड़ी चुनौतियां भी खड़ी हैं। आज के समय में देश की ज्यादातर कारें और बाइक E100 ईंधन को झेलने के लिए तैयार नहीं हैं। इसके लिए खास तरह के ‘फ्लेक्स-फ्यूल इंजन’ की जरूरत पड़ेगी, जो E20 से लेकर E100 तक के किसी भी इथेनॉल मिक्स ईंधन पर आसानी से चल सकें। अच्छी बात यह है कि कुछ दिग्गज वाहन निर्माता कंपनियों ने इस दिशा में तेजी से काम शुरू कर दिया है और हाल ही में कई फ्लेक्स-फ्यूल कार और बाइक के मॉडल भी पेश किए हैं, जो जल्द ही बाजार में बिकने के लिए तैयार होंगे।
इस तकनीक के कुछ तकनीकी पहलू और नुकसान भी हैं जिन पर ध्यान देना जरूरी है। ऑटो विशेषज्ञों के मुताबिक, इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता (कैलोरीफिक वैल्यू) सामान्य पेट्रोल के मुकाबले थोड़ी कम होती है, जिसकी वजह से वाहनों का माइलेज कुछ कम हो सकता है। इसके अलावा, अगर इस ईंधन को पुराने वाहनों में डाला गया, तो उनके इंजन और फ्यूल सिस्टम खराब होने का खतरा भी रहेगा। यही वजह है कि पूरे देश में एक साथ E100 लागू करना तुरंत संभव नहीं है।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती पूरे देश के हर पेट्रोल पंप पर E100 की उपलब्धता सुनिश्चित करना और किफायती दामों पर फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां आम जनता तक पहुंचाना है। जानकारों का मानना है कि आने वाले कुछ सालों तक देश में E20 पेट्रोल और E100 ईंधन दोनों साथ-साथ बिकेंगे और धीरे-धीरे बाजार में E100 की हिस्सेदारी बढ़ती जाएगी। कुल मिलाकर, भारत की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण को साफ-सुथरा रखने और किसानों को अमीर बनाने के लिहाज से E100 एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है, बशर्ते देश में इसका इंफ्रास्ट्रक्चर और गाड़ियों की तकनीक तेजी से कदम आगे बढ़ाए।







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