नई दिल्ली: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने अपने अत्याधुनिक नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में लॉन्च कर दिया है। यह टेलीस्कोप करीब 16 लाख किलोमीटर दूर लैग्रेंज प्वाइंट-2 (L2) तक पहुंचेगा, जहां से यह ब्रह्मांड के उन रहस्यों को समझने में मदद करेगा, जिनका जवाब वैज्ञानिक लंबे समय से तलाश रहे हैं।

डार्क एनर्जी और डार्क मैटर पर होगी खास नजर

रोमन स्पेस टेलीस्कोप का मुख्य उद्देश्य डार्क एनर्जी, डार्क मैटर और सौरमंडल के बाहर मौजूद ग्रहों यानी एक्सोप्लैनेट्स का अध्ययन करना है। वैज्ञानिक इसके जरिए यह समझने की कोशिश करेंगे कि ब्रह्मांड किस तरह बना, समय के साथ इसमें बदलाव कैसे आया और इसके तेजी से फैलने के पीछे कौन-सी ताकत काम कर रही है।

हबल से 100 गुना ज्यादा बड़ा दृश्य क्षेत्र

रोमन टेलीस्कोप की सबसे बड़ी खासियत इसका व्यापक दृश्य क्षेत्र है। इसका वाइड फील्ड इंस्ट्रूमेंट हबल स्पेस टेलीस्कोप की तुलना में करीब 100 गुना ज्यादा बड़ा क्षेत्र एक बार में देख सकेगा। इसकी मदद से वैज्ञानिक बहुत कम समय में आकाश के बड़े हिस्से का सर्वे कर पाएंगे। NASA के अनुसार, रोमन ब्रह्मांड का सर्वे हबल की तुलना में करीब 1,000 गुना तेज गति से कर सकेगा।

रोजाना 1.4 टेराबाइट डेटा भेजेगा

रोमन स्पेस टेलीस्कोप में 300 मेगापिक्सल का इंफ्रारेड कैमरा लगाया गया है। यह हर दिन करीब 1.4 टेराबाइट डेटा पृथ्वी पर भेजने में सक्षम होगा, जो अब तक के NASA के खगोल विज्ञान मिशनों में सबसे अधिक डेटा दरों में से एक है। वैज्ञानिक इस विशाल डेटा का विश्लेषण करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और नागरिक वैज्ञानिकों की भी मदद लेंगे।

हजारों नए ग्रहों की खोज की उम्मीद

टेलीस्कोप का एक अहम लक्ष्य हमारे सौरमंडल के बाहर मौजूद ग्रहों की खोज और उनके अध्ययन को आगे बढ़ाना है। इसके जरिए वैज्ञानिक हमारी आकाशगंगा में मौजूद ग्रह प्रणालियों का व्यापक अध्ययन कर सकेंगे। इसमें लगा कोरोनाग्राफ इंस्ट्रूमेंट दूसरे तारों के आसपास मौजूद बड़े ग्रहों की सीधे तस्वीर लेने की तकनीक को भी आगे बढ़ाएगा।

तीन महीने की यात्रा के बाद शुरू होगा मिशन

लॉन्च के बाद रोमन टेलीस्कोप करीब तीन महीने की यात्रा कर L2 तक पहुंचेगा। वहां पहुंचने के बाद इसके उपकरणों की जांच और कैलिब्रेशन की प्रक्रिया शुरू होगी। NASA को उम्मीद है कि रोमन की पहली वैज्ञानिक तस्वीरें 2027 की शुरुआत में जारी की जा सकती हैं। इसका प्राथमिक मिशन पांच साल का है, हालांकि पर्याप्त ईंधन उपलब्ध रहने पर इसे करीब 10 साल तक बढ़ाया जा सकता है।

रोमन स्पेस टेलीस्कोप हबल और जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के साथ मिलकर ब्रह्मांड को समझने की वैज्ञानिक कोशिशों को और आगे बढ़ाएगा। इसका व्यापक सर्वेक्षण वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड की संरचना, उसके विस्तार, डार्क मैटर, डार्क एनर्जी और दूर स्थित ग्रहों के बारे में नई जानकारी दे सकता है।