लखनऊ: उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को अब एक नई पहचान मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में इस महत्वाकांक्षी परियोजना का नाम ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नोएडा-जेवर’ रखने के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी गई। मुख्यमंत्री ने लखनऊ में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान राज्य सरकार के इस निर्णय की घोषणा की।

सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने पर अभिनंदन

कैबिनेट बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में संवैधानिक प्रमुख के रूप में 25 वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण होने के अवसर पर एक विशेष अभिनंदन प्रस्ताव भी पारित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व और सतत मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश ने बुनियादी ढांचे और सर्वांगीण विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में जेवर एयरपोर्ट का नामकरण उनके नाम पर करने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई।

दिल्ली-NCR और पश्चिमी UP के लिए मील का पत्थर

जेवर में स्थित यह इंटरनेशनल एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर (NCR) और पूरे उत्तर भारत के लिए एक गेम-चेंजर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है। इसका प्राथमिक उद्देश्य नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट पर हवाई यातायात के बढ़ते दबाव को कम करना और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक व व्यापारिक क्षेत्रों को वैश्विक स्तर पर सीधे हवाई कनेक्टिविटी प्रदान करना है।

इस एयरपोर्ट को एक्सप्रेसवे, मेट्रो और अन्य अत्याधुनिक परिवहन प्रणालियों से एकीकृत करने की योजना है, जिससे नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, आगरा, मथुरा और हरियाणा के प्रमुख आर्थिक केंद्रों से आने-जाने वाले यात्रियों को सीधी सुविधा मिलेगी। इस सुगम आवागमन से क्षेत्र में व्यापार, पर्यटन, निवेश और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को अभूतपूर्व गति मिलने की संभावना है।

नाम परिवर्तन की आगामी प्रक्रिया

राज्य कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद अब नाम परिवर्तन की प्रशासनिक और वैधानिक प्रक्रियाएं शुरू की जाएंगी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय और संबंधित केंद्रीय निकायों से आवश्यक स्वीकृतियों तथा आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के साथ ही यह नया नाम औपचारिक रूप से लागू हो जाएगा। इस निर्णय के साथ ही जेवर एयरपोर्ट को देश के सबसे प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर लैंडमार्क के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ा दिया गया है।