
नई दिल्ली: भारत में बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने और बाल विवाह जैसी कुप्रथा को समाप्त करने की दिशा में जारी प्रयासों की संयुक्त राष्ट्र (UN) ने वैश्विक मंच पर सराहना की है। वैश्विक संस्था ने भारत की फ्लैगशिप योजनाओं, ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए माना कि बीते एक दशक में देश में लड़कियों की शिक्षा दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, बाल विवाह के मामलों में आई गिरावट में लक्षित सरकारी नीतियों के साथ-साथ व्यापक सामाजिक भागीदारी ने निर्णायक भूमिका निभाई है।
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर वैश्विक मंथन
‘अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस’ के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र स्थित भारत और सिएरा लियोन के स्थायी मिशनों द्वारा एक विशेष उच्चस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ‘बालिकाओं में निवेश, हमारा भविष्य बदलना’ विषय पर आधारित इस सत्र में दुनिया भर में लड़कियों की शिक्षा, सुरक्षा और मौलिक अधिकारों को सशक्त करने की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा हुई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यूनिसेफ (UNICEF) की उप कार्यकारी निदेशक हन्नान सुलेमान ने कहा कि निरंतर वित्तीय व नीतिगत निवेश, जमीनी स्तर पर जन-भागीदारी और सुदृढ़ प्रशासनिक रणनीतियों से ही धरातल पर वास्तविक बदलाव संभव है। उन्होंने भारत में बालिकाओं के शैक्षणिक विकास और बाल विवाह रोकने के लिए सरकार व समाज द्वारा चलाए जा रहे संयुक्त अभियानों की सफलता को रेखांकित किया।
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ से बदला सामाजिक दृष्टिकोण
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथनेनी हरीश ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना की सफलता का खाका प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस पहल ने समाज की पारंपरिक सोच को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है। इससे न केवल सरकारी सेवाओं की पहुँच सुलभ हुई है, बल्कि प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में लड़कियों के नामांकन (gross enrolment ratio) में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि बालिकाओं की शिक्षा और स्वास्थ्य में किया गया निवेश केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका गुणात्मक लाभ आने वाली पीढ़ियों को भी मिलता है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से लड़कियों को आधुनिक कौशल सीखने, नए रोजगार के अवसर प्राप्त करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलती है—जिससे अंततः परिवारों की समृद्धि और राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
स्टेम (STEM) और एआई (AI) के क्षेत्र में बढ़ती भागीदारी
तकनीकी और वैज्ञानिक शिक्षा में भारतीय महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति का उल्लेख करते हुए राजदूत हरीश ने अपने निजी अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वे स्वयं मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे, तब उनकी कक्षा में एक भी छात्रा नहीं थी। इसके विपरीत, आज उनके पूर्व विश्वविद्यालय में इस स्ट्रीम में छात्राओं की संख्या लगभग 70 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है, जो सामाजिक परिवर्तन का एक ज्वलंत उदाहरण है।
आगे की राह पर बात करते हुए उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और डिजिटल स्पेस में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल और साइबर स्पेस को बालिकाओं के लिए सुरक्षित बनाना तथा उभरती तकनीकों को उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना समय की माँग है।
इस अवसर पर सिएरा लियोन की विदेश मामलों एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग उप मंत्री जेनेबा बंगुरा ने भी बालिकाओं की शिक्षा व सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब किसी बालिका को शिक्षा से वंचित किया जाता है या कम उम्र में विवाह के लिए विवश किया जाता है, तो संपूर्ण समाज उसकी अंतर्निहित क्षमताओं और देश के विकास में मिलने वाले योगदान से वंचित रह जाता है।





