नई दिल्ली: लोकसभा ने शुक्रवार को विपक्ष के हंगामे के बीच जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित कर दिया। सदन में विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के कारण विधेयक पर बहस नहीं हो सकी। अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा।

विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के समय पर पंजीकरण को बढ़ावा देना तथा लंबे समय बाद होने वाले पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक सख्त बनाना है। नए प्रावधान के अनुसार, यदि किसी जन्म या मृत्यु का पंजीकरण घटना के दो वर्ष से अधिक समय बाद कराया जाता है, तो इसके लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) की अनुमति अनिवार्य होगी।

मौजूदा व्यवस्था में एक वर्ष से अधिक की देरी से पंजीकरण के लिए जिला मजिस्ट्रेट, उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति पर्याप्त होती है। संशोधन के बाद एक से दो वर्ष तक की देरी के मामलों में यही व्यवस्था लागू रहेगी, जबकि दो वर्ष से अधिक की देरी वाले मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट की मंजूरी आवश्यक होगी। इसके अलावा विधेयक में कानूनी शब्दावली को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के अनुरूप भी अद्यतन किया गया है।

सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्षी सांसद छात्र प्रदर्शन पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर विरोध कर रहे थे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति की मांग कर रहे थे। इस बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के चर्चा में भाग नहीं लेने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार इस महत्वपूर्ण विधेयक पर बहस चाहती थी। अध्यक्षता कर रहे भाजपा सांसद दिलीप सैकिया ने भी बिना विपक्ष के सहयोग के विधेयक पारित होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।