
नई दिल्ली: भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में वैश्विक राजनीति, आतंकवाद, व्यापार, आर्थिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। सम्मेलन के अंत में जारी नई दिल्ली घोषणापत्र में सदस्य देशों ने कई मुद्दों पर साझा रुख सामने रखा। खास बात यह रही कि घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की गई और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात दोहराई गई।
पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा
BRICS देशों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। नई दिल्ली घोषणापत्र में आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर दिया गया। साथ ही आतंकवादियों, उनके मददगारों और उन्हें सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत बताई गई।
भारत के लिए इसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि चीन समेत BRICS के सभी सदस्य देशों ने पहलगाम हमले की निंदा का समर्थन किया। हालांकि घोषणापत्र में किसी देश का नाम लेकर आरोप नहीं लगाया गया।
एकतरफा टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों पर चिंता
BRICS देशों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में एकतरफा तरीके से लगाए जाने वाले टैरिफ और दूसरे व्यापारिक प्रतिबंधों को लेकर भी चिंता जताई। सदस्य देशों ने नियम आधारित और अधिक खुली अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया।
घोषणापत्र में संरक्षणवादी नीतियों और ऐसे कदमों का विरोध किया गया, जो वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकते हैं। इस मुद्दे का महत्व ऐसे समय में और बढ़ जाता है, जब दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच टैरिफ और व्यापार को लेकर तनाव बना हुआ है।
UNSC में सुधार और ग्लोबल साउथ की आवाज
BRICS देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ की अधिक भागीदारी की मांग करता रहा है।
नई दिल्ली घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को मौजूदा वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप अधिक प्रतिनिधित्व वाला बनाने की बात कही गई। इससे विकासशील देशों की वैश्विक फैसलों में भूमिका बढ़ाने की भारत की कोशिशों को समर्थन मिला है।
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा
BRICS देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सीमा पार भुगतान को आसान बनाना और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थानीय मुद्राओं की भूमिका बढ़ाना है।
BRICS के स्तर पर स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान को बढ़ावा देने की चर्चा लंबे समय से चल रही है। नई दिल्ली में हुए सम्मेलन में भी इस दिशा में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।
टेक्नोलॉजी, AI और औद्योगिक सहयोग पर जोर
सम्मेलन में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते महत्व पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टेक्नोलॉजी और महत्वपूर्ण खनिजों के इस्तेमाल को किसी तरह के दबाव या हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने को लेकर चिंता जताई और वैश्विक सहयोग की जरूरत बताई। वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने BRICS देशों के बीच ओपन-सोर्स AI सहयोग की पहल का प्रस्ताव रखा।
BRICS के एजेंडे में स्वास्थ्य, ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, MSME, बुनियादी ढांचे और युवाओं के कौशल विकास जैसे मुद्दों को भी शामिल किया गया। ऐसे में सम्मेलन से भारत को आर्थिक और तकनीकी सहयोग के साथ ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने का मंच भी मिला।
भारत-चीन संबंधों में भी दिखी बातचीत की नई शुरुआत
BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच भी मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ व्यापार, बाजार पहुंच और दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। यह बैठक भारत-चीन संबंधों में तनाव कम करने की कोशिशों के बीच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कुल मिलाकर, नई दिल्ली में हुआ BRICS सम्मेलन भारत के लिए आतंकवाद के खिलाफ साझा वैश्विक रुख, व्यापार और आर्थिक सहयोग, UNSC सुधार और ग्लोबल साउथ की भूमिका जैसे मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताएं रखने का अहम मंच रहा। सम्मेलन में जारी घोषणापत्र ने BRICS के भीतर अलग-अलग देशों के मतभेदों के बावजूद साझा मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश को भी सामने रखा।





