
नई दिल्ली: देश की राजनीति में जनरेशन Z (Gen Z) तेजी से सबसे प्रभावशाली और निर्णायक वोट बैंक बनकर उभर रही है। अगले वर्ष उत्तर प्रदेश समेत सात राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2029 तक Gen Z भारत का सबसे बड़ा मतदाता वर्ग बन जाएगा, जिससे चुनावी मुद्दों, प्रचार के तरीकों और राजनीतिक विमर्श की दिशा बदल सकती है।
रिपोर्टों के अनुसार, 18 से 28 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। जागरण की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2029 के लोकसभा चुनाव तक देश में करीब 26.3 करोड़ Gen Z मतदाता मतदान के पात्र होंगे, जो कुल मतदाताओं का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा बन सकते हैं। यही कारण है कि भाजपा सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दल इस वर्ग को अपने पक्ष में करने के लिए नई रणनीतियां तैयार कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि Gen Z पारंपरिक जाति और धर्म की राजनीति से आगे बढ़कर रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, स्टार्टअप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और बेहतर अवसरों जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देती है। इसलिए अब राजनीतिक दल अपने घोषणापत्र और चुनावी अभियानों में इन विषयों को प्रमुखता से शामिल कर रहे हैं।
हाल के छात्र आंदोलनों और सोशल मीडिया आधारित अभियानों ने यह भी साबित किया है कि Gen Z डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए राजनीतिक विमर्श को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया मंचों पर सक्रिय यह पीढ़ी पारंपरिक चुनावी प्रचार की बजाय सीधे संवाद और तथ्यों पर आधारित राजनीति को अधिक महत्व देती है। यही वजह है कि राजनीतिक दल भी अब डिजिटल कैंपेन और सोशल मीडिया आउटरीच पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब समेत अगले वर्ष चुनाव वाले राज्यों में Gen Z मतदाताओं का रुख चुनावी नतीजों पर निर्णायक प्रभाव डाल सकता है। इन राज्यों के चुनाव 2029 के लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माने जा रहे हैं और यहां युवाओं का मतदान व्यवहार भविष्य की राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय कर सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में वही राजनीतिक दल बढ़त हासिल करेंगे, जो युवाओं की आकांक्षाओं, रोजगार, शिक्षा, डिजिटल भागीदारी, पारदर्शी शासन और भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों को अपनी राजनीति के केंद्र में रखेंगे। 2029 की सियासत में Gen Z केवल एक मतदाता वर्ग नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति तय करने वाली सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर सकती है।





