कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के दौरान कई मतदान केंद्रों पर ईवीएम (EVM) से जुड़ी गड़बड़ियों और गंभीर अनियमितताओं की खबरें सामने आने के बाद भारतीय चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि जिन मतदान केंद्रों पर ईवीएम के बटनों पर टेप लगाए जाने या अन्य किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ के आरोपों की पुष्टि होगी, वहां का मतदान तत्काल रद्द कर पुनर्मतदान (re-polling) कराया जाएगा। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी भी बूथ पर ईवीएम को जानबूझकर बाधित करने या मतदाताओं को गुमराह करने की कोशिश पाई जाती है, तो वहां की पूरी प्रक्रिया शून्य मानी जाएगी। आयोग ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि किसी विशेष विधानसभा क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं व्यापक स्तर पर पाई जाती हैं, तो पूरे निर्वाचन क्षेत्र में फिर से चुनाव कराने पर भी गंभीरता से विचार किया जा सकता है।
मतदान के इस चरण में कई स्थानों पर मशीनों में तकनीकी खराबी और संचालन में बाधा की भी शिकायतें प्राप्त हुईं, जिससे कुछ समय के लिए मतदान प्रक्रिया प्रभावित हुई। हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तकनीकी समस्याओं को सुलझाया और मतदान को फिर से सुचारु रूप से शुरू कराया। इस बीच, विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप का तीखा दौर शुरू हो गया है, जहाँ कुछ नेताओं ने प्रशासन पर मतदाताओं को वोट देने में होने वाली दिक्कतों के प्रति लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। इसके जवाब में प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मतदान केंद्रों पर निष्पक्षता और शांति बनाए रखने के लिए भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और किसी भी प्रकार की शरारत बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
दूसरे चरण का यह मतदान राज्य की कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील सीटों पर हो रहा है, जिसे राजनीतिक दृष्टि से सत्ता का निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। चुनाव आयोग ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। अनियमितता के दोषी पाए जाने वाले कर्मियों या व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। आयोग का यह त्वरित हस्तक्षेप और पुनर्मतदान का कड़ा निर्णय यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है कि आम जनता का भरोसा चुनाव प्रक्रिया पर बना रहे और प्रत्येक मतदाता बिना किसी डर या बाधा के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।

