
बीजिंग: दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के बीच कूटनीतिक बिसात बिछ चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय चीन के बेहद महत्वपूर्ण दौरे पर हैं, जहाँ बीजिंग के ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में उनका भव्य और औपचारिक स्वागत किया गया। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लाल कालीन (रेड कार्पेट) बिछाकर ट्रंप का इस्तकबाल किया, जिसके बाद दोनों नेताओं ने सैन्य ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ का निरीक्षण किया। इसके तुरंत बाद दोनों देशों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की द्विपक्षीय वार्ता शुरू हो गई है, जिस पर इस वक्त पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
वक्त का पहिया और चीन की मजबूत स्थिति
मौजूदा वैश्विक समीकरणों को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार की वार्ता में शी जिनपिंग का हाथ ट्रंप के मुकाबले काफी मजबूत है। अल जजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह मुलाकात चीन के लिए सबसे अनुकूल समय पर हो रही है। इसकी बड़ी वजह यह है कि अमेरिका इस समय पश्चिम एशिया के भीषण तनाव और युद्ध जैसे संकटों में बुरी तरह उलझा हुआ है। इसके अलावा, घरेलू मोर्चे पर भी राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता के ग्राफ में पिछले कुछ हफ्तों में गिरावट आई है, जिसने उन्हें रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है।
टैरिफ की जंग और व्यापारिक तनाव
चीन और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों की कड़वाहट इस बैठक का मुख्य केंद्र है। ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद से ही व्यापार युद्ध (Trade War) तेज हो गया था। अमेरिका ने चीनी सामानों पर 145 प्रतिशत तक के रिकॉर्ड टैरिफ थोप दिए थे। इसके पलटवार में चीन ने न केवल अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क बढ़ाए, बल्कि रेयर अर्थ मेटल्स (दुर्लभ धातुओं) के निर्यात पर भी लगाम लगा दी। ये धातुएं वैश्विक स्मार्टफोन और कार उद्योग की रीढ़ मानी जाती हैं, जिससे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर गहरा असर पड़ा है।
बदलती सप्लाई चेन और रिकॉर्ड ट्रेड सरप्लस
पीटरसन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स के विशेषज्ञ चैड ब्राउन के मुताबिक, ऊंचे टैरिफ के दबाव के कारण कई अमेरिकी कंपनियों ने अपनी सप्लाई चेन चीन से हटाकर मेक्सिको, वियतनाम और ताइवान जैसे देशों की ओर मोड़नी शुरू कर दी है। हालांकि, चीन ने इस झटके को बखूबी संभाला है। अटलांटिक काउंसिल के विशेषज्ञ डेक्सटर रॉबर्ट्स का कहना है कि चीन ने अमेरिका पर अपनी निर्भरता घटाते हुए बाकी दुनिया के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को इतना विस्तार दिया है कि पिछले साल उसका ट्रेड सरप्लस 1.2 ट्रिलियन डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों की राय: दबाव में अमेरिका, स्थिर चीन
मिडिलबरी इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के प्रोफेसर वेई लियांग का मानना है कि यह दौरा एक ऐसे ‘टर्निंग पॉइंट’ पर हो रहा है जहाँ अमेरिका कई मोर्चों पर दबाव झेल रहा है। चाहे वह भू-राजनीतिक अस्थिरता हो या आर्थिक चुनौतियां, ट्रंप के सामने मुश्किलें अनेक हैं। वहीं, चीन तुलनात्मक रूप से स्थिर और रणनीतिक रूप से तैयार नजर आ रहा है।
इस हाई-प्रोफाइल बैठक का परिणाम न केवल इन दो देशों के भविष्य को तय करेगा, बल्कि आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा और दशा भी निर्धारित करेगा। फिलहाल, कूटनीति के इस खेल में चीन का पलड़ा भारी नजर आ रहा है।







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