नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही ट्रेड डील को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि दोनों देश व्यापार समझौते के काफी करीब हैं और इस पर जल्द ही सहमति बन सकती है। ट्रंप के मुताबिक, यह नया समझौता उनके द्वारा पहले किए गए व्यापार समझौतों से काफी अलग होगा, हालांकि उन्होंने इसके संभावित बदलावों के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी।

मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब ट्रंप से भारत के साथ व्यापार समझौते की मौजूदा स्थिति के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वे समझौता करना चाहते हैं और हम भी करने जा रहे हैं, क्योंकि हम इसके बेहद करीब हैं। यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत के दौरे पर हैं। बीती 20 अक्टूबर को मुंबई में रुबियो ने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई। अमेरिकी विदेश मंत्री ने भी इस ट्रेड डील को लेकर उम्मीद जताते हुए कहा कि इसके कुछ तकनीकी पहलुओं पर अभी काम बाकी है, जिसे अंतिम रूप देने में महीनों के बजाय केवल कुछ सप्ताह का समय लग सकता है, हालांकि अभी इस पर अंतिम मुहर नहीं लगी है।

बता दें कि भारत और अमेरिका ने इसी साल फरवरी में द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण की रूपरेखा तैयार करने की घोषणा की थी, लेकिन अमेरिका की टैरिफ नीति में बदलाव और भारत के रूस से तेल खरीदने जैसे अहम मुद्दों के कारण बातचीत की रफ्तार धीमी पड़ गई थी। भारत की मुख्य कोशिश यह है कि अमेरिकी बाजार में उसके निर्यातकों को बांग्लादेश, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले किसी भी प्रकार का नुकसान न उठाना पड़े। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि समझौते के पहले चरण पर बातचीत अंतिम दौर में है और सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इसे लागू करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान के बाद भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता टी.एस. सिंह देव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सवाल उठाते हुए यह जानना चाहा है कि इस महत्वपूर्ण समझौते पर भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट बयान क्यों सामने नहीं आया है। फिलहाल, दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बयानों से समझौते की दिशा में सकारात्मक प्रगति के संकेत जरूर मिल रहे हैं, लेकिन इसकी अंतिम शर्तों, लागू होने की तारीख और पूरी प्रक्रिया को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।