नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा है कि राहुल गांधी ने अपने दावों को हाइड्रोजन बम बताकर देशभर में शोर मचाया, लेकिन उनका यह दावा दिवाली का पटाखा भी साबित नहीं हुआ। उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर राजनीतिक टकराव को बढ़ावा देने तथा संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाने का गंभीर आरोप लगाया।

राजनाथ सिंह ने कहा कि राहुल गांधी और उनके सहयोगियों को यह समझना चाहिए कि देश में किसी को भी अराजकता फैलाने की छूट नहीं दी जा सकती। उन्होंने राहुल गांधी को टकराव और विरोध की पुरानी राजनीति छोड़कर संवाद और राष्ट्र निर्माण के सकारात्मक रास्ते को अपनाने की सलाह दी। रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि सत्ता परिवर्तन, सड़क पर आंदोलन और विरोध जैसे नारों के जरिए देश में जानबूझकर अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की जा रही है और इस तरह की राजनीति देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल के दौरान लगी इमरजेंसी, 1984 के सिख विरोधी नरसंहार और कारसेवकों पर गोली चलाए जाने जैसी ऐतिहासिक घटनाओं का भी जिक्र किया और पार्टी पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया।

चुनावी प्रक्रिया का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि देश में पहले मतदाता पहचान पत्र के बिना भी चुनाव हुआ करते थे और उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि क्या इसे वोट चोरी कहा जाएगा या कामचोरी। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा देश की संवैधानिक संस्थाओं का पूरा सम्मान किया है और कभी उन पर बेवजह संदेह नहीं जताया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल में नियुक्त रहे चुनाव आयुक्तों का भी हवाला दिया और कहा कि 1990 में रातोंरात दो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की गई थी। इसके साथ ही उन्होंने नवीन चावला की नियुक्ति और एमएस गिल के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद केंद्र सरकार में मंत्री पद संभालने का भी उल्लेख किया।

रक्षा मंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की दुखद मृत्यु के बाद पूरे चुनाव को स्थगित किए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस हिंसा और सत्ता परिवर्तन जैसे तरीकों का सहारा लेकर अपनी हार का बदला लेना चाहती है और देश में बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करने का प्रयास कर रही है। राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी से यह सीधा सवाल भी किया कि क्या वह समाजवादी पार्टी के समर्थन के बिना अमेठी से कभी चुनाव जीत सकते थे। कांग्रेस कार्यालय के भीतर हुई आपसी मारपीट का जिक्र करते हुए उन्होंने पार्टी को सलाह दी कि वे दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने घर की भीतरूनी स्थिति को सुधारें। उन्होंने अंत में एक बार फिर दोहराया कि राहुल गांधी के वोट चोरी के सभी आरोप बेदम हैं और उनका कथित ‘हाइड्रोजन बम’ पूरी तरह फुस्स साबित हुआ है।