नई दिल्ली, 5 जून, 2026: भारत की लॉजिस्टिक्स लागत अब जीडीपी के 8 से 9 प्रतिशत के दायरे में पहुंच गई है, लेकिन आगे की प्रगति केवल लागत कम करने से नहीं, बल्कि माल की तेज आवाजाही, बेहतर क्रियान्वयन और मल्टीमॉडल परिवहन व्यवस्था को प्रभावी बनाने से होगी। यह बात वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के डीपीआईआईटी (DPIIT) लॉजिस्टिक्स डिवीजन के एसोसिएट डायरेक्टर राजेश मेनन ने इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) के ‘एक्सीलेंस इन मोशन’ फोरम में कही।

मेनन ने बताया कि प्रमुख माल ढुलाई गलियारों पर ट्रकों की औसत गति अभी 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मानक 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटा है। उन्होंने कहा कि लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में मौजूद व्यावहारिक चुनौतियों को दूर करने के लिए उद्योग, नीति निर्माताओं और कार्यान्वयन एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा।

फोरम में उद्योग जगत का प्रतिनिधित्व करते हुए आईसीसी नेशनल लॉजिस्टिक्स एंड सप्लाई चेन कमेटी के चेयरमैन कनिष्क सेठिया ने कहा कि भारत का लॉजिस्टिक्स बाजार 380 अरब डॉलर से अधिक का होने का अनुमान है। उन्होंने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, पीएम गति शक्ति और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति को माल ढुलाई में सुधार का प्रमुख आधार बताया। साथ ही, उन्होंने वैश्विक सप्लाई चेन व्यवधानों के बीच मजबूत और लचीले नेटवर्क विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

रेल मंत्रालय के रेलवे बोर्ड के एडिशनल मेंबर मनोज सिंह ने बताया कि भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 1.7 अरब टन सामान ढुलाई की है और अब तेजी से 2 अरब टन के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है। इस मुकाम के लिए पूरे लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम, विशेषकर फर्स्ट और लास्ट माइल कनेक्टिविटी को मजबूत करने में भरपूर सहयोग की जरूरत है। हालांकि थोक वस्तुएं रेल फ्रेट के केंद्र में हैं, लेकिन गति और विश्वसनीयता चाहने वाले क्षेत्रों के लिए भी अवसर बढ़ रहे हैं। ई-कॉमर्स और FMCG जैसी समय-संवेदनशील सप्लाई चेन के लिए शुरू की गई शेड्यूल्ड पार्सल और रैपिड कार्गो सेवाओं को शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसके साथ ही, रेलवे देश का सबसे ऊर्जा-कुशल परिवहन माध्यम है, जो कुल बिजली खपत का महज 2% उपयोग कर भारत के लगभग एक-चौथाई माल यातायात को संभालता है। देश में अधिक सस्टेनेबल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क बनाने के लिए रेल आधारित परिवहन बढ़ाना आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों मोर्चों पर फायदेमंद होगा।

वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी के चेयरमैन सुशांत पुरोहित ने समुद्री क्षेत्र में हो रहे निवेशों की जानकारी देते हुए ₹15,000 करोड़ के आउटर हार्बर प्रोजेक्ट, ग्रीन हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का उल्लेख किया। वहीं, एनएचईवी के प्रोग्राम डायरेक्टर अभिजीत सिन्हा ने 5,500 किलोमीटर लंबे इलेक्ट्रिक हाईवे नेटवर्क की योजना को स्वच्छ ऊर्जा आधारित माल ढुलाई की दिशा में बड़ा कदम बताया।

फोरम में यह साझा निष्कर्ष सामने आया कि भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की अगली छलांग नई घोषणाओं से नहीं, बल्कि बेहतर क्रियान्वयन, मजबूत मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, भविष्य की मांग के अनुरूप बुनियादी ढांचे के विकास और वैश्विक सप्लाई चेन जोखिमों को कम करने से मिलेगी।