
पीपल फॉर लेजिस्लेटिव एडवोकेसी एंड रिसर्च ने पीआर प्रोफेशनल्स के सहयोग से मीडिया और गवर्नेंस पर वेबिनार आयोजित किया
विशेषज्ञों ने डिजिटल युग में फेक न्यूज़, नैतिकता और नियमन की चुनौतियों पर चर्चा की
वक्ताओं ने पारदर्शिता, विश्वसनीयता और स्वदेशी मानकों की आवश्यकता पर जोर दिया
नई दिल्ली: पीपल फॉर लेजिस्लेटिव एडवोकेसी एंड रिसर्च (PLAR) ने देश के प्रमुख जनसंपर्क संस्थानों में से एक पीआर प्रोफेशनल्स के साथ मिलकर शुक्रवार को “मीडिया एंड गवर्नेंस: इश्यूज़ एंड चैलेंजेज़” विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता शारदा स्कूल ऑफ मीडिया, फिल्म एंड एंटरटेनमेंट, शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा के सहायक प्रोफेसर डॉ. आकिब अनवर बट्ट रहे। कार्यक्रम का संचालन मीडिया प्रैक्टिशनर दानिश रहमान ने किया।

वेबिनार में डिजिटल युग में मीडिया और गवर्नेंस के बदलते संबंधों पर विस्तार से चर्चा की गई।
अपने संबोधन में डॉ. बट्ट ने जनमत निर्माण, नीतिगत विमर्श को प्रभावित करने और लोकतांत्रिक जवाबदेही को मजबूत करने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने फेक न्यूज़, नैतिक चुनौतियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के नियमन की जटिलताओं पर भी अपने विचार व्यक्त कियें। ज़िम्मेदार पत्रकारिता की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि तेज़ी से बदलते सूचना युग में विश्वसनीयता और पारदर्शिता बनाए रखना बेहद ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि प्रभावी शासन और जनविश्वास सुनिश्चित करने के लिए मीडिया और नीति-निर्माताओं के बीच रचनात्मक संवाद आवश्यक है।
लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए पीआरपी ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. सर्वेश तिवारी ने कहा, “यदि शर्ट का एक बटन भी गलत जगह लग जाए तो पूरी शर्ट की बनावट बिगड़ जाती है। इसी तरह यदि मीडिया सही ढंग से कार्य नहीं करता, तो यह पूरे लोकतांत्रिक ढांचे को प्रभावित कर सकता है।”
वेबिनार में पीआरपी ग्रुप के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राहुल कश्यप ने भारत में मीडिया स्वतंत्रता के आकलन के लिए स्वदेशी मानकों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “भारत को मीडिया स्वतंत्रता मापने के लिए अपना स्वयं का तरीका विकसित करना चाहिए, जो देश के सामाजिक-राजनीतिक संदर्भ को दर्शाता हो, न कि केवल बाहरी सूचकांकों पर आधारित हो।”
इस सत्र में छात्रों, शिक्षाविदों और मीडिया पेशेवरों ने भाग लिया और मीडिया तथा गवर्नेंस के बीच उभरती चुनौतियों और अवसरों पर विचार-विमर्श किया। वेबिनार का समापन मीडिया में नैतिकता को मजबूत करने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में उसकी भूमिका को सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर संवाद की आवश्यकता के आह्वान के साथ हुआ।








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