नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन से जुड़े नियमों में एक बड़ा और सख्त बदलाव किया है। अब अगर कोई कर्मचारी सेवा के दौरान भ्रष्टाचार, अनुशासनहीनता, या किसी अन्य गंभीर कारण से नौकरी से निकाला जाता है, तो उसे पेंशन या रिटायरमेंट से जुड़े अन्य लाभ नहीं दिए जाएंगे।
नया नियम क्या कहता है?
22 मई 2025 को जारी किए गए केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) संशोधन नियम, 2025 के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी किसी गलत काम या गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल पाया जाता है और उसे बर्खास्त कर दिया जाता है, तो उसे पेंशन, पारिवारिक पेंशन या अनुकंपा भत्ता नहीं मिलेगा। यानी अब पेंशन देना कर्मचारी के आचरण पर निर्भर करेगा।
यह फैसला संबंधित विभाग या मंत्रालय की समीक्षा के बाद लिया जाएगा, जिसमें यह तय किया जाएगा कि बर्खास्त कर्मचारी को कोई लाभ दिया जाए या नहीं।
पहले क्या होता था?
पहले के नियमों में इस तरह की सख्ती नहीं थी। अगर किसी कर्मचारी को नौकरी से हटाया भी जाता था, तो उसे कुछ हद तक पेंशन या अन्य रिटायरमेंट बेनिफिट्स मिल जाते थे। लेकिन अब अगर सेवा समाप्ति अनुशासनहीनता या भ्रष्टाचार जैसे गंभीर कारणों से हुई है, तो उसे कोई वित्तीय लाभ नहीं मिलेगा।
किन पर लागू नहीं होगा यह नियम?
यह संशोधित नियम IAS, IPS, IFS (भारतीय वन सेवा) के अधिकारियों, रेलवे कर्मचारियों और दैनिक वेतनभोगियों पर लागू नहीं होगा। इसके अलावा, यह नियम उन कर्मचारियों पर ही लागू होगा जो 31 दिसंबर 2003 या उससे पहले नौकरी में आए थे, यानी जो अभी भी पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) के तहत आते हैं।
सरकार का उद्देश्य क्या है?
सरकार इस कदम को “भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत देख रही है। सरकार का मानना है कि इससे सरकारी सिस्टम में जवाबदेही और अनुशासन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यह संदेश भी जाएगा कि अगर कोई कर्मचारी नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे सेवा समाप्ति के बाद भी किसी तरह का आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा।
इस नए नियम से यह साफ है कि अब सरकारी सेवा केवल कार्यकाल तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कर्मचारी का पूरा आचरण- नौकरी के दौरान और सेवा के अंत तक, पेंशन पाने के अधिकार को प्रभावित करेगा।
साभार: पंजाब केसरी


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