नई दिल्ली:  साहित्य और संस्कृति के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों को भी मंच देते हुए, दिल्ली लिटरेचर फेस्टिवल के 14वें संस्करण में साइबर अपराध पर एक अहम जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में बढ़ते ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी को लेकर लोगों को सतर्क रहने का संदेश दिया गया।

दिल्ली लिटरेचर फेस्टिवल में आयोजित इस विशेष सत्र में भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के निदेशक निशांत कुमार ने बताया कि आजकल साइबर ठग खुद को पुलिस या जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वे फोन कॉल या मैसेज के जरिए यह दावा करते हैं कि व्यक्ति किसी मामले में फंसा हुआ है या उसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया गया है, और फिर केस निपटाने या अकाउंट क्लियर करने के नाम पर पैसे मांगते हैं।

निशांत कुमार ने साफ शब्दों में कहा कि कोई भी पुलिस अधिकारी फोन या मैसेज के जरिए न तो पूछताछ करता है और न ही पैसे की मांग करता है। अगर कोई इस तरह का दावा करता है, तो वह पूरी तरह से धोखाधड़ी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसे कॉल्स से घबराएं नहीं और तुरंत सतर्क हो जाएं।

उन्होंने यह भी बताया कि पढ़े-लिखे लोग और ऊंचे पदों पर काम करने वाले पेशेवर अक्सर इन ठगों के निशाने पर होते हैं, क्योंकि अपराधी उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा और कानूनी डर का फायदा उठाते हैं। जल्दबाजी और डर का माहौल बनाकर ठग लोगों को सोचने का मौका नहीं देते और इसी का लाभ उठाते हैं।

डिजिटल इंडिया पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश में डिजिटल सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है, जो गर्व की बात है। लेकिन इसके साथ डिजिटल जागरूकता का बढ़ना भी उतना ही जरूरी है। जहां जानकारी की कमी होती है, वहीं साइबर अपराध पनपते हैं।

उन्होंने बताया कि इसी को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2019 में गृह मंत्रालय के तहत I4C की स्थापना की गई, ताकि राज्यों, बैंकों और अन्य संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाकर साइबर अपराधों पर काबू पाया जा सके।

सत्र में ‘साइबर दोस्त’ पहल के बारे में भी जानकारी दी गई, जिसके जरिए सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर लोगों को ऑनलाइन ठगी से बचाव की जानकारी दी जाती है। नागरिकों को सलाह दी गई कि किसी भी साइबर अपराध की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

इस जागरूकता सत्र के जरिए दिल्ली लिटरेचर फेस्टिवल ने यह संदेश दिया कि डिजिटल दौर में सुरक्षित रहने के लिए सतर्कता, सही जानकारी और समय पर कार्रवाई बेहद जरूरी है।