नई दिल्ली: आईटी और डिजिटल सेवा कंपनी इंसेडो के सह-संस्थापक और सीईओ नितिन सेठ की चर्चित किताब “ह्यूमन एज इन द एआई एज” के एक साल पूरे होने के अवसर पर नई दिल्ली के अलोफ्ट बाय मैरियट में इसके हिंदी संस्करण “एआई युग में मानवीय श्रेष्ठता” और एक नए एआई प्लेटफ़ॉर्म NitinSeth.AI का भव्य शुभारंभ किया गया। अमेज़न पर लगातार 13 महीनों से बेस्टसेलर रही यह किताब इस मौलिक सवाल का उत्तर खोजती है कि जैसे-जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) इंसान जैसी क्षमताएं हासिल कर रही है, इंसानों की अपनी विशिष्ट पहचान और श्रेष्ठता क्या रहेगी।

पत्रकारों को संबोधित करते हुए नितिन सेठ ने कहा कि एआई के कारण अगले 15 वर्षों में लगभग 35 प्रतिशत नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, जिनमें व्हाइट-कॉलर भूमिकाएं और विशेष रूप से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। हालांकि, उन्होंने इसे खतरे के बजाय एक ऐतिहासिक अवसर के रूप में देखने पर बल देते हुए कहा कि एआई युग पारंपरिक नौकरियों के दौर का अंत हो सकता है, लेकिन यह एंटरप्रेन्योरशिप के एक नए स्वर्णिम युग की शुरुआत है।

भारत के संदर्भ में चर्चा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सॉवरेन एआई में निवेश करने से बड़ी संख्या में नौकरियां पैदा नहीं होंगी। उन्होंने एंथ्रोपिक का उदाहरण देते हुए बताया कि महज 4,000 कर्मचारियों वाली यह कंपनी 70 अरब डॉलर का राजस्व कमा रही है, जो यह साबित करता है कि कोर एआई कंपनियों को बहुत कम कार्यबल की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि भारत में निवेशकों के पास पूंजी की कोई कमी नहीं है, लेकिन युवा फाउंडर्स में विस्तृत तकनीकी ज्ञान और उद्योग की समझ की कमी है, जिसके लिए एजुकेशन इकोसिस्टम को वैश्विक मानकों के समकक्ष लाकर व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ना होगा।

छोटे शहरों से उभरती प्रतिभाओं पर विश्वास जताते हुए सेठ ने कहा कि जिस तरह भारतीय क्रिकेट में अब छोटे शहरों के खिलाड़ियों का दबदबा है, ठीक वैसे ही एआई भी छोटे कस्बों के युवाओं को समान अवसर देकर उद्यमिता का लोकतांत्रीकरण कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने जोर दिया कि भविष्य में केवल तकनीकी कौशल की जगह प्रॉब्लम सॉल्विंग, क्रिएटिविटी, लीडरशिप और कम्यूनिकेशन जैसे ‘सॉफ्ट स्किल्स’ अधिक महत्वपूर्ण हो जाएंगे।

कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पत्रकार सोनिया सिंह द्वारा संचालित “AI for Bharat” विषय पर एक विशेष पैनल चर्चा भी आयोजित की गई, जिसमें डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के एमडी व सीईओ अखिल कुमार, गरुड़ प्रकाशन के सीईओ संक्रांत सानु, पर्यावरणविद पीपल बाबा और नितिन सेठ ने विचार साझा किए। कार्यक्रम के अंत में अपनी किताब के मुख्य संदेश को दोहराते हुए नितिन सेठ ने कहा कि भविष्य से डरने की नहीं, बल्कि इसका निर्माण करने की आवश्यकता है, इसलिए डर को उम्मीद में बदलें और उम्मीद को ठोस कदम में।