नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर चलती ट्रेन के अंदर पूजा-अर्चना का एक वीडियो इन दिनों तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक पुजारी बोगी के भीतर धार्मिक अनुष्ठान करते दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यह सवाल उठने लगे कि क्या रेलवे के सामान्य यात्री कोच में इस तरह के आयोजन की अनुमति है? विवाद बढ़ता देख उत्तर रेलवे ने तुरंत पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए अपनी सफाई जारी की है।

रेलवे ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो किसी सामान्य यात्री कोच या रेगुलर ट्रेन का नहीं है, बल्कि यह एक निजी तौर पर व्यावसायिक (कमर्शियल) आधार पर बुक की गई ‘सैलून कार’ (सैलून कोच) का वीडियो है। इस विशेष सैलून को मुंबई तक की यात्रा के लिए करीब 3.08 लाख रुपये का अग्रिम (एडवांस) भुगतान कर रेलवे के नियमों के तहत ही बुक किया गया था।

वरिष्ठ अधिकारियों के लिए होता है ‘सैलून कोच’, आम लोग भी करा सकते हैं बुकिंग

रेलवे प्रशासन के अनुसार, सैलून कार एक विशेष श्रेणी का वीआईपी कोच होता है, जिसका उपयोग सामान्य परिस्थितियों में वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों द्वारा निरीक्षण के लिए किया जाता है। हालांकि, कोई भी आम नागरिक निर्धारित नियमों का पालन कर और उचित शुल्क चुकाकर इसे अपने निजी उपयोग के लिए बुक करा सकता है। इस मामले में भी बुकिंग कराने वाले पक्ष द्वारा सभी जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गई थीं और यह बुकिंग पूरी तरह से वैध थी।

उत्तर रेलवे ने आगे बताया कि इस धार्मिक आयोजन से रेलवे के संचालन, सुरक्षा व्यवस्था या किसी अन्य यात्री की सुविधा पर कोई असर नहीं पड़ा। चूंकि यह पूजा पूरी तरह से निजी रूप से बुक किए गए सैलून कोच के भीतर आयोजित की गई थी, इसलिए इसमें किसी भी रेल नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है।

‘सुहागरात कोच’ से अलग है यह मामला, नियमों का नहीं हुआ उल्लंघन

गौरतलब है कि हाल के दिनों में रेलवे से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हैं। इससे पहले एक ट्रेन कोच को “सुहागरात कोच” की तरह फूलों से सजाने का वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसके बाद रेलवे ने नियमों के उल्लंघन पर संबंधित मामले में सख्त कार्रवाई की थी।

अब पूजा वाले वीडियो पर स्थिति साफ करते हुए रेलवे अधिकारियों ने कहा है कि दोनों मामलों की परिस्थितियां बिल्कुल अलग-अलग हैं। वायरल वीडियो में दिखाई गई पूजा पूरी तरह से निजी दायरे में और वैध बुकिंग के बाद की गई थी, अतः इसे किसी भी तरह के अनधिकृत आयोजन से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।