
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में युद्ध के बादलों और गहराते तनाव के बीच भारत के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर आई है। ईरान ने रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) से भारतीय तेल टैंकरों को गुजरने की विशेष अनुमति दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के कारण इस समुद्री रास्ते पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप होने की कगार पर पहुँच गई थी।
कूटनीतिक बातचीत का बड़ा असर
इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के पीछे भारत की सक्रिय विदेश नीति और कूटनीति का बड़ा हाथ माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री के बीच हाल ही में उच्च स्तरीय चर्चा हुई थी। इस बातचीत का मुख्य केंद्र बिंदु भारतीय जहाजों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को बिना किसी बाधा के जारी रखना था। भारत की चिंताओं को समझते हुए ईरान ने भारतीय ध्वज वाले टैंकरों को ‘सुरक्षित मार्ग’ (Safe Passage) देने पर सहमति जताई।
रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय तेल टैंकर “पुष्पक” और “परिमल” पहले से ही इस मार्ग का उपयोग कर रहे हैं और सुरक्षित रूप से अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं। यह न केवल व्यापारिक दृष्टि से, बल्कि भारत और ईरान के मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों का भी एक बड़ा संकेत है।
दुनिया की लाइफ लाइन है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को वैश्विक अर्थव्यवस्था की ‘गले की नस’ कहा जाता है। यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% से 30% हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। हाल के दिनों में इस क्षेत्र में जहाजों पर हुए हमलों और बढ़ते सैन्य तनाव के कारण बीमा कंपनियों ने शिपिंग दरों में भारी बढ़ोतरी कर दी थी, जिससे वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मच गया था। ऐसे में भारतीय जहाजों को सुरक्षा का आश्वासन मिलना वैश्विक बाजार के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्यों है यह संजीवनी?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% हिस्सा आयात करता है। इसमें से एक बहुत बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है, जो होर्मुज के रास्ते ही भारत पहुँचता है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता, तो भारत में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आने और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) टूटने का खतरा पैदा हो सकता था। ईरान के इस कदम से भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित हुई है और खाड़ी देशों से आने वाले तेल की निरंतरता बनी रहेगी।
यद्यपि इस संवेदनशील मुद्दे पर अभी भी कूटनीतिक स्तर पर बारीकी से नजर रखी जा रही है, लेकिन भारतीय टैंकरों को मिली यह हरी झंडी वैश्विक संकट के समय में भारत के प्रभाव को दर्शाती है। यह घटनाक्रम साबित करता है कि तनावपूर्ण माहौल में भी भारत अपनी तटस्थता और मजबूत कूटनीति के बल पर अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में सक्षम है।







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