नई दिल्ली: हिंद महासागर के अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में ईरानी युद्धपोत IRIS Dena पर हुए घातक हमले ने दुनिया भर में सनसनी फैला दी है। यह हमला उस समय हुआ जब ईरानी जहाज भारतीय नौसेना के साथ एक साझा अभ्यास पूरा कर वापस लौट रहा था। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक अमेरिकी पनडुब्बी ने Mk-48 टॉरपीडो से युद्धपोत को निशाना बनाया, जिससे जहाज समुद्र में डूब गया। इस भीषण हमले में जहाज पर सवार 130 नाविकों में से 87 की मौत हो गई है, जबकि कई अब भी लापता हैं। हालांकि, श्रीलंका की नौसेना ने तत्परता दिखाते हुए एक बचाव अभियान चलाया और 32 नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

इस घटना के बाद ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव चरम पर पहुँच गया है। ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने इस हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अमेरिका को सीधे तौर पर चेतावनी दी है कि इस दुस्साहस के लिए उसे “कड़वा पछतावा” होगा। अराघची ने कहा कि ईरान के तट से 2000 मील दूर बिना किसी उकसावे के किया गया यह हमला एक खतरनाक मिसाल है, जिसके गंभीर परिणाम भविष्य में भुगतने पड़ सकते हैं। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है और वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।