नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा को लेकर एक अहम बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब जो उम्मीदवार IAS, IPS, IFS या अन्य सिविल सेवाओं में एक बार नियुक्त हो जाते हैं, वे दोबारा UPSC सिविल सेवा परीक्षा नहीं दे सकेंगे। यह नियम UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2026 से लागू होगा।
अब तक कई ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जहाँ चयन के बाद भी अधिकारी बेहतर रैंक या दूसरी सेवा पाने के लिए फिर से परीक्षा देते थे। UPSC के नए नियमों के अनुसार, एक बार सेवा ज्वाइन करने के बाद दोबारा परीक्षा देने की अनुमति नहीं होगी। आयोग का मानना है कि इससे चयन प्रक्रिया में स्थिरता आएगी और नए उम्मीदवारों को अधिक अवसर मिलेंगे।
हालाँकि, UPSC ने एक वन-टाइम छूट (One-Time Relaxation) का प्रावधान भी रखा है। इसके तहत, जो उम्मीदवार 2026 की परीक्षा में चयनित होते हैं, उन्हें 2027 में केवल एक बार बेहतर रैंक या सेवा के लिए परीक्षा देने का मौका मिलेगा। इसके लिए शर्त यह होगी कि उम्मीदवार को पहले मिली सेवा की ट्रेनिंग को उस समय जॉइन नहीं करना होगा। यदि 2027 में बेहतर सेवा मिलती है, तो उम्मीदवार को दोनों में से किसी एक सेवा को चुनना होगा।
UPSC के अनुसार, यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि प्रशासनिक सेवाओं में प्रतिबद्धता और निरंतरता बनी रहे। बार-बार परीक्षा देने से सेवाओं में खाली पदों की समस्या और प्रशिक्षण में बाधा आती थी। नए नियमों से यह प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और पारदर्शी बनेगी।
आयोग ने यह भी साफ किया है कि यह नियम उन उम्मीदवारों पर लागू नहीं होगा, जिन्हें अभी तक किसी भी सेवा में नियुक्ति नहीं मिली है। वे पहले की तरह निर्धारित प्रयासों के अनुसार परीक्षा दे सकते हैं।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2026 के लिए आवेदन की प्रक्रिया जारी है और आयोग द्वारा जारी नोटिफिकेशन में इन सभी बदलावों की विस्तृत जानकारी दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला भविष्य में UPSC की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों की रणनीति को भी प्रभावित करेगा और चयन के बाद सेवा को प्राथमिकता देने की सोच को मज़बूत करेगा।

