नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इजरायली संसद ‘कनेसट’ में दिए गए ऐतिहासिक भाषण ने वैश्विक कूटनीति में एक नई इबारत लिख दी है। इस संबोधन के बाद इजरायली विशेषज्ञों और विश्लेषकों की व्यापक प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं, जिनका एक ही सार है, भारत अब बिना किसी हिचकिचाहट और संकोच के इजरायल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।

प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार ‘जेरूशलम पोस्ट’ के प्रमुख विश्लेषक हर्ब कीनन ने अपने लेख में प्रधानमंत्री मोदी के इस कदम की सराहना करते हुए इसे महज एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि “दो प्राचीन सभ्यताओं का मिलन” करार दिया है। उन्होंने रेखांकित किया कि मोदी का संदेश स्पष्ट था, भारत और इजरायल के संबंध अब केवल लेन-देन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये साझा मूल्यों और आपसी विश्वास पर आधारित हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कनेसट के पटल से आतंकवाद के विरुद्ध भारत और इजरायल की साझा नीति और संकल्प को पूरी मजबूती से दुनिया के सामने रखा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “दुनिया की कोई भी वजह या तर्क निर्दोष आम नागरिकों की हत्या को सही नहीं ठहरा सकता।” अपने भाषण के अंत में उन्होंने जब हिब्रू भाषा में ‘Am Yisrael Chai’ (इजरायल के लोग जीवित रहें) के शब्दों का उच्चारण किया, तो यह संदेश सीधा इजरायली जनता के दिलों तक पहुँचा। यह दर्शाता है कि भारत न केवल इजरायल की चुनौतियों और पीड़ा को समझता है, बल्कि इस मुश्किल वक्त में उसके साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़ा है।

विश्लेषकों ने इस बात पर भी गौर किया कि प्रधानमंत्री ने 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद हुई क्षति पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए आतंकवाद के खिलाफ एक बेहद स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाया। हर्ब कीनन के अनुसार, मोदी ने जिस गरिमा और सम्मानजनक ढंग से अपना संबोधन प्रबंधित किया, उसने यह साबित कर दिया कि भारत-इजरायल संबंधों में अब एक नई परिपक्वता और गहराई आ चुकी है।

इजरायली विशेषज्ञों का मानना है कि इस ऐतिहासिक दौरे और भाषण के दूरगामी परिणाम होंगे। इससे सुरक्षा, अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकी, व्यापार और सांस्कृतिक क्षेत्रों में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और अधिक सशक्त होगी। यह दौरा दोनों देशों के साझा हितों को वैश्विक पटल पर एक नई ऊंचाई प्रदान करने वाला साबित होगा।