नई दिल्ली: भारत और फ्रांस के बीच रक्षा साझेदारी अब एक ऐतिहासिक मोड़ पर पहुँच गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कर्नाटक के वेमगल में ‘टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स’ और ‘एयरबस’ की साझेदारी से बनी H-125 हेलीकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन का वर्चुअल उद्घाटन किया। यह दुनिया की पहली ऐसी निजी सुविधा है जहाँ वे हेलीकॉप्टर बनाए जाएंगे जो माउंट एवरेस्ट जैसी ऊँचाइयों तक उड़ान भरने में सक्षम हैं। यह कदम न केवल भारत के एयरोस्पेस सेक्टर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि प्रधानमंत्री के “मेक इन इंडिया” और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के सपने को भी नई उड़ान देता है।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास जताया कि साल 2026 दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों के लिए एक नया अध्याय लिखेगा। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जानकारी दी कि इस H-125 कार्यक्रम में ₹1,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश होगा, जिससे देश में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। सिर्फ हेलीकॉप्टर ही नहीं, दोनों देशों ने अपनी सैन्य साझेदारी को अगले 10 वर्षों के लिए बढ़ा दिया है और अब भारत में ही घातक हैमर (HAMMER) मिसाइलों के निर्माण पर भी सहमति बनी है।
इन बड़े फैसलों के साथ ही भारत और फ्रांस के संबंधों को अब ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले समय में रक्षा, व्यापार और नई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दोनों देश एक-दूसरे के सबसे करीबी सहयोगी होंगे। संक्षेप में कहें तो, यह साझेदारी न केवल भारत की सैन्य ताकत को बढ़ाएगी, बल्कि उसे वैश्विक स्तर पर रक्षा निर्माण का एक बड़ा केंद्र (Hub) बनाने में भी मदद करेगी।

