नई दिल्ली: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की आज होने वाली बैठक में पाकिस्तान को दिए जा रहे नए कर्ज को लेकर भारत कड़ा विरोध दर्ज कराएगा। भारत का कहना है कि पाकिस्तान आतंकवाद को संरक्षण देता है और ऐसे देश को बिना सख्त निगरानी के वित्तीय सहायता देना क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान की नीतियां आतंकवादी संगठनों को बढ़ावा देती हैं और हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया था, जिसे भारत ने आत्मरक्षा में किया गया सैन्य ऑपरेशन बताया।
भारत IMF बोर्ड के समक्ष यह मामला उठाएगा कि पाकिस्तान ने पूर्व में मिले कर्ज का उपयोग किस प्रकार किया और क्या वह धनराशि आतंकवादी गतिविधियों में प्रयुक्त हुई। भारत की मांग है कि पाकिस्तान को कोई भी नया कर्ज देने से पहले IMF को इस पर गहन जांच करनी चाहिए।
गौरतलब है कि पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है और IMF से 7 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज के साथ-साथ 1.3 अरब डॉलर की क्लाइमेट रेजिलिएंस लोन की उम्मीद कर रहा है।
भारत का मानना है कि यदि IMF ने बिना सख्त शर्तों और निगरानी के पाकिस्तान को कर्ज दिया, तो यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से आतंकवाद को सहयोग देने जैसा होगा, जिससे पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता पर असर पड़ सकता है।


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