Gorakhpur: पूर्वोत्तर रेलवे के गोरखपुर यांत्रिक कारखाने में कार्यरत सीनियर सेक्शन इंजीनियर ने अपनी तकनीकी दक्षता और नवाचार से रेलवे को बड़ी राहत दिलाई है। ट्रेन कोचों में लगे बायोटॉयलेट्स की लंबे समय से चली आ रही तकनीकी समस्या का समाधान कर उन्होंने रेलवे को करोड़ों रुपये की संभावित हानि से बचाया है।

रेलवे के बायोटॉयलेट्स में फ्लशिंग और मेंटेनेंस से जुड़ी दिक्कतों के कारण न केवल यात्रियों को परेशानी हो रही थी, बल्कि सफाई व्यवस्था और पर्यावरण मानकों पर भी असर पड़ रहा था। इन बायोटॉयलेट्स की मरम्मत का जिम्मा जिस निजी एजेंसी के पास था, उसके असफल रहने के बाद गोरखपुर यांत्रिक कारखाने के इंजीनियर ने स्वयं इस चुनौती को स्वीकार किया।

इंजीनियर ने तकनीकी अध्ययन और प्रयोग के जरिए बायोटॉयलेट सिस्टम की खराबी को दूर किया और उसे दोबारा पूरी तरह कार्यशील बनाया। इस समाधान से जहां ट्रेनों में स्वच्छता व्यवस्था बेहतर हुई, वहीं बार-बार मरम्मत और उपकरण बदलने पर होने वाला भारी खर्च भी बच गया। रेलवे प्रशासन के अनुसार, इस पहल से रेलवे को लंबे समय में करोड़ों रुपये की बचत होगी।

रेलवे अधिकारियों ने इस नवाचार की सराहना करते हुए इसे यात्रियों की सुविधा, स्वच्छ भारत अभियान और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। इंजीनियर के इस कार्य के लिए उन्हें रेलवे स्तर पर सम्मानित भी किया गया है।

पूर्वोत्तर रेलवे का मानना है कि इस तरह के तकनीकी नवाचार न केवल रेलवे के संचालन को अधिक किफायती बनाते हैं, बल्कि यात्रियों को बेहतर और स्वच्छ यात्रा अनुभव भी प्रदान करते हैं।
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