
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को भारत सरकार के सचिवों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को विभागों के बीच बेहतर तालमेल के साथ काम करने और अलग-अलग विभागों में बने ‘साइलो’ को खत्म करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकार को सिर्फ मौजूदा चुनौतियों और आंकड़ों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि देश के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लंबी अवधि की सोच के साथ काम करना चाहिए।
युवाओं और विश्वविद्यालयों से बढ़े संवाद
बैठक में प्रधानमंत्री ने नीति निर्माण में युवाओं और शिक्षण संस्थानों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार के विभागों, विश्वविद्यालयों और युवाओं के बीच अधिक संवाद से नए और अलग तरह के विचार सामने आ सकते हैं। इससे भविष्य की नीतियों को देश की युवा आबादी की आकांक्षाओं के अनुरूप तैयार करने में मदद मिलेगी।
विभागों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर
पीएम मोदी ने विभागों के बीच समन्वय की कमी को एक बड़ी चुनौती बताते हुए अधिकारियों से अपनी जिम्मेदारियों का स्वामित्व लेने और टीम भावना के साथ काम करने को कहा। उन्होंने कोविड-19 महामारी और पश्चिम एशिया संकट के दौरान विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच हुए बेहतर समन्वय का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी कार्य संस्कृति को स्थायी रूप से अपनाया जाना चाहिए।
AI के इस्तेमाल में इंसानी भूमिका जरूरी
बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से AI का प्रभावी और जिम्मेदार तरीके से इस्तेमाल करने को कहा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक के इस्तेमाल के साथ मानवीय हस्तक्षेप और निर्णय क्षमता भी बनी रहनी चाहिए। उन्होंने AI की क्षमता और मानव विशेषज्ञता को साथ लेकर नए समाधान विकसित करने पर जोर दिया।
डेटा को राष्ट्रीय संपत्ति की तरह इस्तेमाल करने की जरूरत
प्रधानमंत्री ने सरकारी डेटा के बेहतर इस्तेमाल और विभिन्न विभागों के डेटा सिस्टम के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर भी जोर दिया। अलग-अलग विभागों में डेटा संग्रह और प्रबंधन के तरीकों में अंतर के कारण इसकी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। ऐसे में डेटा सिस्टम को अधिक इंटरऑपरेबल बनाने पर ध्यान देने की जरूरत बताई गई।
रक्षा और समुद्री क्षेत्र पर भी चर्चा
बैठक में रक्षा क्षेत्र में रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने और इसके लिए रक्षा शिक्षा व मानव संसाधन विकास को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। समुद्री क्षेत्र में उन्होंने जहाज निर्माण की प्रगति की मिशन मोड में समीक्षा करने और बंदरगाह विकास से आगे बढ़कर पोर्ट-लेड डेवलपमेंट पर ध्यान देने की बात कही।





