नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक वीडियो अस्थायी रूप से हटाए जाने के मामले में मेटा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। संसद की संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग से सार्वजनिक माफी की मांग की है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों के भीतर माफी नहीं मांगी गई तो कंपनी के खिलाफ सिफारिशें की जा सकती हैं।

समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने बैठक के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री का आधिकारिक संदेश केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक संस्थानों और करोड़ों नागरिकों का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में बिना उचित कारण इस तरह की कार्रवाई गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मेटा संतोषजनक जवाब देने में विफल रहता है तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत उसे मिलने वाले ‘सेफ हार्बर’ संरक्षण पर भी पुनर्विचार किया जा सकता है।

बैठक में मेटा के अलावा गूगल, यूट्यूब, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और स्नैपचैट के प्रतिनिधियों के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) तथा गृह मंत्रालय के अधिकारी भी मौजूद रहे। यह बैठक प्रधानमंत्री मोदी के फेसबुक वीडियो को हटाए जाने के बाद बुलाई गई थी।

इससे पहले मेटा ने बयान जारी कर कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो तकनीकी त्रुटि के कारण हट गया था और बाद में उसे बहाल कर दिया गया। हालांकि केंद्र सरकार ने कंपनी की इस सफाई को पर्याप्त नहीं माना और पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत जवाब मांगा है।