
नई दिल्ली: दैनिक जागरण ने अपने प्रमुख अभियान ‘हिंदी हैं हम’ के तहत नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में दैनिक जागरण कृति सम्मान 2025 का आयोजन किया। इस समारोह में देशभर के प्रतिष्ठित लेखक, पत्रकार, शिक्षाविद, प्रकाशक और साहित्य प्रेमी शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य समकालीन हिंदी साहित्य और प्रकाशन जगत में उत्कृष्ट योगदान देने वाले रचनाकारों को सम्मानित करना था।









कार्यक्रम की शुरुआत प्रख्यात शायर डॉ. बशीर बद्र के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। इसके बाद बनारस घराने की प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका सुनंदा शर्मा ने अपनी प्रस्तुति से कार्यक्रम को सांगीतिक स्वर दिए। समारोह के मुख्य अतिथि राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह रहे।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण “हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष” विषय पर आयोजित विशेष सत्र रहा। इस चर्चा में दैनिक जागरण के एग्जीक्यूटिव एडिटर विष्णु त्रिपाठी, आईआईएमसी की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौर, वरिष्ठ पत्रकार रूबिका लियाकत और हर्षवर्धन त्रिपाठी ने भाग लिया। वक्ताओं ने हिंदी पत्रकारिता की ऐतिहासिक यात्रा, समाज में उसकी भूमिका और वर्तमान मीडिया परिदृश्य की चुनौतियों पर विचार साझा किए।
इस अवसर पर दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति छात्रवृत्ति कार्यक्रम के चयनित शोधार्थियों को भी सम्मानित किया गया। चयनित शोधार्थी राहुल कुमार, कायनात तरन्नुम और नकुल शर्मा विभिन्न समकालीन विषयों पर शोध करेंगे।
दैनिक जागरण कृति सम्मान 2025 के अंतर्गत हिंदी बेस्टसेलर 2025 और ‘उत्तम में सर्वोत्तम’ श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए गए।
हिंदी बेस्टसेलर 2025 श्रेणी में कथा साहित्य के लिए दिव्य प्रकाश दुबे को उनकी पुस्तक ‘यार पापा’, कविता के लिए स्वयम श्रीवास्तव को ‘घर के वास्ते’, नॉन-फिक्शन के लिए गौहर रज़ा को ‘मिथकों से विज्ञान तक – ब्रह्मांड के विकास की बदलती कहानी’ तथा अनुवाद श्रेणी में सत्यार्थ नायक की पुस्तक ‘महागाथा – पुराणों की 100 कथाएं’ के हिंदी अनुवादक आशुतोष गर्ग को सम्मानित किया गया।
वहीं ‘उत्तम में सर्वोत्तम’ श्रेणी में कथा साहित्य के लिए मनोज राजन त्रिपाठी की ‘कसरी मसरी’, नॉन-फिक्शन के लिए अनिमेष मुखर्जी की ‘ठाकुरबाड़ी – गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का कुटुंब वृत्तांत’, कविता के लिए नीलेश मिश्रा की ‘मैं अक्सर सोचता हूँ’ तथा अनुवाद श्रेणी में अमी गणात्रा की ‘महाभारत का अनावरण’ को सम्मानित किया गया।
अपने समापन संबोधन में हरिवंश नारायण सिंह ने पत्रकारिता और साहित्य के गहरे संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साहित्य केवल समाज का दर्पण नहीं, बल्कि उसे दिशा देने का भी कार्य करता है। उन्होंने दैनिक जागरण को इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए बधाई दी।
यह समारोह हिंदी साहित्य, पत्रकारिता और पठन संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए दैनिक जागरण की निरंतर प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण रहा।







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