केंद्र सरकार डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है, जिसका लक्ष्य वित्त वर्ष 2025-26 तक 20 हजार करोड़ ट्रांजेक्शन को पूरा करना है। इसी दिशा में सरकार ने यूपीआई के लिए 1500 करोड़ रुपये के इंसेंटिव को मंजूरी दी है। खासकर छोटे शहरों और गांवों में यूपीआई को लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। सरकार द्वारा लाई गई यह इंसेंटिव स्कीम छोटे और मझोले व्यापारियों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे डिजिटल भुगतान को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा।
दुकानदारों के लिए यूपीआई क्यों अहम है? इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यूपीआई एक तेज, सुरक्षित और सरल भुगतान सेवा है, जो दुकानदारों के लिए लेन-देन को आसान बनाती है। यूपीआई के माध्यम से भुगतान करने के लिए एक वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (VPA) तैयार किया जाता है, जिसे बैंक अकाउंट से लिंक किया जाता है। इसके बाद भुगतान के लिए बैंक का नाम या आईएफएससी कोड याद रखने की जरूरत नहीं होती, बल्कि सिर्फ मोबाइल नंबर के जरिए पेमेंट रिक्वेस्ट प्रोसेस हो जाती है।
छोटे और मझोले व्यापारियों को कैसे मिलेगा फायदा? सरकार की इस योजना के तहत 2000 रुपये तक के पर्सन टू मर्चेंट (P2M) ट्रांजेक्शन पर 0.15% इंसेंटिव मिलेगा। यानी, अगर कोई ग्राहक 2000 रुपये का सामान खरीदता है, तो दुकानदार को 3 रुपये का इंसेंटिव मिलेगा। यह स्कीम 1 अप्रैल 2021 से लागू है और व्यापारियों को डिजिटल भुगतान के प्रति और अधिक आकर्षित कर सकती है।


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