नई दिल्ली: नेपाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 35 वर्षीय बालेन शाह ने देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेकर नई शुरुआत की है। राम चंद्र पौडेल ने शीतल निवास में आयोजित एक विशेष समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस घटनाक्रम को नेपाल की पारंपरिक राजनीति के अंत और एक नए युवा युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बधाई दी है और दोनों देशों के संबंध मजबूत करने की उम्मीद जताई है।

बालेन शाह की पार्टी, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी, ने 5 मार्च को हुए आम चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज की। प्रतिनिधि सभा की 275 सीटों में से 182 सीटें जीतकर पार्टी ने भारी बहुमत हासिल किया। खुद बालेन शाह ने झापा-5 सीट से पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को हराकर अपनी मजबूत पकड़ साबित की। यह जीत उन युवाओं की आवाज मानी जा रही है, जिन्होंने भ्रष्टाचार और पुरानी व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन किया था।

नेपाल में अब तक राजनीति पर पारंपरिक नेताओं का दबदबा रहा है, लेकिन बालेन शाह का उभार इस धारणा को बदलता दिख रहा है। एक इंजीनियर, रैपर और काठमांडू के मेयर के रूप में पहचान बनाने वाले बालेन आज युवाओं के बड़े आइकन बन चुके हैं। उनकी साफ छवि और विकास पर आधारित सोच ने जनता का भरोसा जीता है।

उनका शपथ ग्रहण समारोह भी खास रहा, जो राम नवमी के दिन शुभ मुहूर्त में आयोजित हुआ। इस दौरान हिंदू और बौद्ध परंपराओं का अनोखा संगम देखने को मिला, जिसने उनकी सांस्कृतिक सोच को भी दर्शाया।

अब बालेन शाह के सामने कई बड़ी जिम्मेदारियां हैं-रोजगार बढ़ाना, भ्रष्टाचार खत्म करना, अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और भारत-चीन जैसे देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखना।

बालेन शाह का प्रधानमंत्री बनना नेपाल की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत है, जहां युवा नेतृत्व देश की दिशा तय करता नजर आ रहा है।