
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मां गंगा के शीतकालीन गद्दीस्थल मुखीमठ, यानी मुखवा गांव पहुंचने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं। इससे पहले, देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी वर्ष 1966 में हर्षिल आई थीं, लेकिन उन्होंने मुखवा गांव का दौरा नहीं किया था।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा ऐतिहासिक रहा, क्योंकि इससे पहले वह 7 नवंबर 2018 को हर्षिल में सेना के जवानों के साथ दीपावली मनाने आए थे। इस बार, गुरुवार को उन्होंने अपनी शीतकालीन चारधाम यात्रा के तहत हर्षिल और मुखवा का भ्रमण किया। इस प्रस्तावित यात्रा की तैयारियां पिछले एक महीने से की जा रही थीं। हालांकि, खराब मौसम और अन्य कारणों से प्रधानमंत्री का दौरा कुछ बार टल चुका था।
गुरुवार को प्रधानमंत्री का हेलीकॉप्टर हर्षिल स्थित सेना के हेलीपैड पर उतरा, जहां से उनका काफिला सीधे मुखवा गांव के लिए रवाना हुआ। गांव में पहुंचते ही ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक स्वागत समारोह के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया। तय कार्यक्रम के अनुसार, प्रधानमंत्री ने सबसे पहले गंगा मंदिर के गर्भगृह में लगभग 20 मिनट तक पूजा-अर्चना की।
इसके बाद, हर्षिल में आयोजित शीतकालीन पर्यटन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन जनता ने लाइव प्रसारण के माध्यम से सुना। स्थानीय नागरिकों ने उत्तराखंड के प्रति उनकी चिंता और विकास योजनाओं की सराहना की। खासकर टिम्बरसेंण महादेव, माणा गांव में पर्यटन अवसंरचना के विकास और ‘घाम तापो पर्यटन’ की अवधारणा को लेकर उन्होंने खुशी जाहिर की।
प्रधानमंत्री के इस दौरे का सजीव प्रसारण जिला मुख्यालय गोपेश्वर, बस स्टेशन, कलेक्ट्रेट और तहसील कार्यालयों में किया गया। कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री के इस ऐतिहासिक दौरे से उत्तराखंड के पर्यटन को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।